बुरी संगत – Bad company

एक चित्रकार को एक अत्यंत सौम्य किशोर का चित्र बनाना था ! ऐसे लड़के की तलाश में चित्रकार देश विदेश में वर्षो तक मारा फिरा ! बहुत कठिनाई से उसे एक ऐसा लड़का मिला, उसके रोम रोम में सज्जनता टपकती थी उसे सामने बैठाकर चित्र बनाया गया ! चित्र बहुत ही सुन्दर बना ! उसे बाजार में बहुत पसंद किया गया, भारी बिक्री हुई चित्रकार की सर्वत्र प्रशंसा होने लगी उसे धन भी बहुत मिला !

Study_of_Thomas_Graham_by_William_Hogarth_c._1742

 

वर्षो बाद चित्रकार को सुझा की वह एक अत्यंत घृणित और दुष्ट भाव भंगिमा वाले अपराधी का चित्र बनाएगा ! इसके लिए वह अपराधियो के अड्डे , बंदीगृह और दुराचारियो के आवास स्थानों में भ्रमण करने लगा अंत में एक बड़ी डरावनी आकृति का मनुष्य मिला चित्रकार ने उसका चित्र बनाया ,और वह भी बहुत बिक सज्जनता और दुष्टता की दो परस्पर विरोधी प्रतिक्रित्यो का यह अद्भुत जोड़ा , चित्र जगत में बहुत विख्यात हो गया !

एक दिन वही दुष्ट दुराचारी चित्रकार से मिलने आ पहुंचा ! चित्रकार ने उसका परिचय पूछा तो उसने कहा ” यह दोनों चित्र मेरे ही आपने बनाये है ! जब मैं बालक था तब में सौम्य था और अधेड़ हुआ तो ऐसा भयंकर दुष्ट हो गया क्या आप इस रहस्य को जानते है ? चित्रकार अवाक् रह गया ! उसने पूछा ” तुम.. तुम… तुम…… भला इस प्रकार कैसे इतने परिवर्तित हो गए ? अधेड़ ने मुँह ढँक लिया, उसकी आँखे बरसने लगी ! रुंधे गले से बोला- बुरी संगति ने मेरी दुर्गति बनायीं ! चित्रकार ! संगति तुम्हारी कला से भी अधिक प्रभावशाली है !!