नाव मे सफर – Boat ride

एक संत अपने शिष्य के साथ नाव मे सफर कर रहे थे. साथ मे कुछ और लोग भी साथ मे सफर कर रहे थे.

बिच राह मे संत को आभास हुआ की ये नाव डुबने वाली है नाव मे सभी लोगो से संत ने कहा “ये नाव थोडा आगे जाने के बाद डुबने वाली है, आप यहा सब कुद जाओ मै आप सबको बचाने मे मदद करूगा ” लेकीन संत की ईस बात पर किसी ने भी ध्यान नही दिया. नाव मे से संत और उन्हके शिष्य कुद गये.ganges-boats

नाव थोडा आगे जाने के बाद तुफान आया और नाव मे बैठे सभी लोग मारे ग
ये. संत और शिष्य तैर कर बाहर आ गये. शिष्यने संत से पुछा “आपको पहले ही मालुम था, ये नाव डुबने वाली है तो आपने नाव मे बैठने से पहले ही लोगो बता दिया होता तो ये लोग नही मरते.” संत ने कहा “नही नाव मे बैठने के बाद पत्ता लगा के इसमे कुछ लोगो की मुत्यू डुब कर होने वाली है क्योकी उन्ह के करम काफी भारी थे, मै तो उन्हको भी बचाना चाहता था, मगर मेरी बात पर किसीने ध्यान नही दिया.और कुछ निरदोष लोग भी मारे गये”

शिष्यने कहा ” मै समझ सकता हू, के जिन्हके करम भारी थे, उन्हे उन्हके करमो की सजा मिली, मगर बाकी लोग बेवजह क्यो मारे गये गुरूदेव ?” संत मुस्कराये और कुछ जवाब नही दिया. थोडा आगे जाने के बाद शिष्य चिल्ला उठा उसे पैर मे एक चिटी ने काटा जमिन पर काफी चिटीयो का झुंड था. शिष्य उछल-कुद करने लगा, जिससे कई चिटीया मर गई.

संत ने कहा “वत्स तुम्हे तो एक चिटी ने काटा तुमने तो कई चिटीयो को मार दिया.” शिष्यने कहा ” मैने जान-बुझकर नही मारा गुरूदेव ” संत ने कहा “ईश्वर भी किसी को बेवजह सजा नही देता, उन्ह लोगो की मदद करने के लिये ईश्वर ने मुझे भेजा था, मगर मेरी बात को कोई समझ ही नही पाया ”

इस कहनी से ये बताया गया है की ईश्वर खुद गुरू के रूप मे आते है और हमारे लिये क्या गलत है या क्या सही है ये राह दिखाते है मगर हम लोग मोह-माया के चक्कर मे फंसे होने के कारण समझ नही पाते है.