मिस्टर राईट~Mr Right

लेखक गौरांग

वह खूबसूरत थी, हसीन थी, जवान थी, मेधावी थी, साहसी थी, इंटेलेक्चुवल थी,कविता लिखती थी. नाक-नक्स, रंग, हाईट, हेल्थ में भी अव्वल थी. कहने का मतलब एक टोटल पेकेज थी. वैसे तो एक लडकी में इतने सारे गुण एक साथ अमूमन नहीं मिलते. यदा – कदा भी मिलना मुश्किल है. पर क्या करें, कहानी है न ! कहानी के हिरोइन को कुछ ज्यादा ही खास होना पड़ता है. एक्सपेक्टेसन बहुत ज्यादा ही राईज कर गया है. सो डिमांड है, तो डिमांड को मैच भी करना पड़ता है न !

खैर, उसके कालेज के तीन दोस्त थे. बड़े गहरे दोस्त थे. चारों की चौकड़ी कहलाती थी. अब हाई प्रोफाईल हिरोईन के दोस्त भी मैचिंग ही थे. जिम जगत के सिक्स पैक वाले, हाई आई क्यु वाले, हर खेल में आगे रहने वाले, निडर. दोस्ती की केन्द्र वही थी, जिसे धूरी बना कर तीनों दोस्त घूम रहे थे. वह जानती थी कि तीनों उसके लिये दिल रखते हैं, चाहते हैं, वह भी तीनों को पसंद करती थी, पर प्यार के मामले उसके मन में उहापोह था. वह सोचती थी कि किससे प्यार करे और करे तो क्यों करे? आखिर सारी जिन्दगी तो ऐसे ही नहीं चल सकती. उसे इन तीनों में से किसी को चूनना पड़ेगा. या फिर आगे निकल जाना होगा अपने मन की आवाज सुनकर कि “मेरी मंजिल कोई और है.” उसने सीधे-सीधे सामना करने का फैसला कर लिया. आखिर इंटेलेक्चुवल थी, साहसी थी न!

mr right

वह पहले दोस्त के पास गई और सीधा पूछी – तुम्हारे मन में मेरे लिये क्या है ? क्या तुम मुझे प्यार करते हो?

दोस्त ने मौका लपका – मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ.
उसने कहा – सो तो है ही पर मान लो अगर मैं कल को तुम्हें छोड़ दूँ तो?
वह क्रोधित हो गया और क्रोध में अग्निशर्मा हो गुर्राया – तो मैं तुम्हें गोली मार दूँगा और खुद को भी गोली मार लूँगा.
कुछ देर तो वह हतवाक रह गई .फिर बात को हल्का करते हुए बोली – अरे तुम तो बहुत सिरियस हो गये.

फिर वहाँ से वह दूसरे दोस्त के पास के गई और उससे यही सवाल किया – तुम्हें छोड़ दूँ तो?

दूसरा दोस्त ब्याकूल हो गया और उदास हो बोला – फिर जिन्दगी और क्या रहेगा, मैं खुद को गोली मार लूँगा.
एक नया अनुभव था. वह उसे बोली – अरे ! तुम तो सेंटीमेंटल हो गये फिर वह वहाँ सॆ निकल आई.

अब उसे तीसरे दोस्त के पास जाना था.

तीसरे दोस्त से भी उसने यही सवाल किया – बताओ कल को मैं तुम्हें छोड़ दूँ तो तुम क्या करोगे?
तीसरा दोस्त थोड़ी देर चुप रहा. उसके चेहेरे में उसने एक दर्द की लकीर देखी.मगर वह भरसक उसे छुपाने की कोशिश कर रहा था. फिर सम्हलकर कहा – क्या करुँगा, तुम खुश रहो यही प्रार्थना करुँगा. तुम जिन्दगी में खूब सफल होवो यही कामना करुँगा.

फिर एक नया अनुभव. वह हतप्रभ रह गई. फिर एक नया सोच उसक़ॆ दिमाग में आया कि शायद इम्प्रेस करेने का कोशिश कर रहा है. उसने फिर टटोला – और, और क्या करोगे?
तीसरा पूछा – और क्या ?

वह कुछ असमंजस में पड़ बोली – मसलन, मेरा कुछ अहित ही करने की इच्छा हो जाय, शायद जान से ही मार दो. या फिर अपना जान ही ले लो.
तीसरा एक फीकी हँसी हँसा और उल्टा पूछा – क्या तुम जिससे प्यार करती हो, उसका अहित करने की सोच भी सकते हो ? और मैं तुम्हें इतना बुजदिल दिखता हूँ कि जिन्दगी से हार कर अपनी जान ले लूँ?

लड़की और भी असमंजस में पड़ गई, साथ ही प्रभावित भी दिखने लगी. फिर उसने तीसरे दोस्त को कहते सुना. – दरअसल प्यार तो मैं तुमसे करता हूँ, जरूरी नहीं कि तुम भी मुझसे करो. फिर, जबरन बन्दूक के जोर पर मैं तुम्हें धमका कर प्यार करा भी नहीं सकता, न ही इमोसनली ब्लैकमैल कर तुम्हारा प्यार पा स्कता हूँ.

प्यार तो एक मीठा अह्सास है जो बस हो जाता है. दिल में घंटी सी बजने लगती है, दस्तक सा देने लगता है और दिल इसका तसदीक कर देता है. अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिये वह प्यार का अहसास नहीं है तो नहीं है. दोस्त तो तुम तब भी रहोगी. फिर भी मेरे लिये खास थी, हो और सदा रहोगी.

लड़की को दिल में घंटी बजती सुनाई दी. दस्तक पर रिस्पांस भर देना था. उसे उसका मिस्टर राईट मिल चुका था.