मिलो बंदर का खोया हुआ केला

जब मिलो का केला गायब हो जाता है, तो वह अपने दोस्तों पर इल्ज़ाम लगा देता है। सच पता चलने पर वह माफी माँगना, प्यार से पूछना और दोस्ती की कद्र करना सीखता है।

यह दोस्ती पर आधारित एक प्यारी जंगल-कहानी है। मिलो बंदर अपना पसंदीदा केला खोया हुआ समझकर टारा टूकन, एली हाथी और ज़िप्पी ज़ेब्रा पर शक करता है। बाद में उसे पता चलता है कि केला उसने खुद ही दूसरी जगह रखा था। तब मिलो अपनी गलती मानता है, माफी माँगता है और सीखता है कि बिना सोचे-समझे इल्ज़ाम लगाने के बजाय शांत होकर पूछना चाहिए।

मिलो बंदर को केले बहुत पसंद थे—बड़े, छोटे और धब्बेदार। हर सुबह वह एक चमकीला केला चुनता और उसे अपना खास नाश्ता बनाता। वह एक मजेदार केला गीत भी गाता था!

एक धूप भरी सुबह मिलो ने सबसे चमकीला केला चुना, उसे एक चपटी चट्टान पर रखा और चहक कर बोला, 'मैं बेलों पर झूला लगाकर आऊँ, फिर तुम्हें खाऊँगा!' वह खुशी से पूँछ हिलाते हुए दौड़ गया।

तेज़ी से ऊँचे झूलने के बाद मिलो लौट आया, लेकिन चट्टान खाली थी! उसका प्यारा केला जादू की तरह गायब था और उसकी हँसी उलटी हो गई। 'ओह-ओ!' उसने घबराकर कहा।

मिलो की आँखें बड़ी हो गईं। 'मेरा केला गायब है!' वह चीखा और गोल-गोल कूदने लगा। चिंता कानों में गुस्से वाली मधुमक्खियों की तरह भनभनाने लगी। वह कहाँ हो सकता है?

उसका चेहरा सख्त हो गया और पूँछ ढोल की तरह फड़फड़ाने लगी। 'किसी ने चुरा लिया!' मिलो चिल्लाया, पेड़ों की ओर उंगली करके। 'मैं अभी केले का चोर पकड़ूँगा!'

वह टारा टूकन के पास पहुँचा जो बैंगनी जामुन खा रही थी। 'टारा, क्या तुमने मेरा केला लिया?' उसने कड़क आवाज में पूछा। टारा ने अपनी चमकीली चोंच हिलाई, 'नहीं मिलो। बस जामुन—यह देखो रस।' मिलो बड़बड़ाता हुआ चला गया।

फिर वह नदी में पानी खेलती एली हाथी के पास पहुँचा। 'एली, जरूर तुम्हारे पास है!' वह रोया। एली ने ऊँचा पानी छींटा, 'यहाँ सिर्फ पानी है, दोस्त,' उसने नरमी से कहा। मिलो की भौंह और सिकुड़ गई।

मिलो भागकर दौड़ते ज़िप्पी ज़ेब्रा के पास पहुँचा। 'ज़िप्पी, रुको! मेरा केला दे दो!' वह चिल्लाया। हैरानी से धारी काँपीं। ज़िप्पी हाँफते हुए बोला, 'मैं तो बस दौड़ रहा हूँ, दोस्त—मेरे पास कोई नाश्ता नहीं है।'

मिलो ने हाथ बाँध लिए और धप से बैठ गया। 'कोई मानता ही नहीं! कोई मेरा दोस्त नहीं,' वह बड़बड़ाया, अकेले पत्ते जितना उदास। छोटी-छोटी बूँदें उसकी आँखों में झिलमिलाने लगीं।

समय बीता। मिलो का पेट जंगल के ढोल जैसा गुड़गुड़ाया। वह खाली चट्टान को देखता रहा और आह भरी, अब भी भूखा और उदास। एक छोटी-सी सोच उसके मन में कुलबुलाने लगी।

'रुको…' उसने फुसफुसाया। मिलो ने चट्टानों के पीछे, पत्तों के नीचे, जड़ों के आसपास झाँका—कुछ नहीं मिला। उसने सिर खुजलाया और मन में सुबह की पूरी फिल्म दोहराई।

'मैंने चुना… रखा… फिर उस लट्ठे पर बैठा!' वह चिल्लाया। मिलो दौड़ा और वहाँ, उस लट्ठे पर, थोड़ी धूल लगी लेकिन सुरक्षित, उसका खोया केला रखा था।

मिलो झुक गया। 'यह तो मैंने ही हटाया था,' उसने आह भरी। 'मैंने बेकार में दोस्तों पर इल्ज़ाम लगाया।' उसके गाल लाल हुए, पर उसने केला सावधानी से उठाया और माफी माँगने चला।

सबके सामने मिलो ने गहरी साँस ली। 'दोस्तों, केला मिल गया। मैं भूल गया था कि मैंने ही उसे लट्ठे पर रखा था। चिल्लाने और इल्ज़ाम लगाने के लिए माफ़ करना। मैं गलत था। कृपया माफ कर दो।'

टारा ने पंख फड़फड़ाए, एली मुस्कराई और ज़िप्पी ने सिर हिलाया। 'हम तुम्हें माफ़ करते हैं,' उन्होंने कहा। 'अगली बार पूछना, इल्ज़ाम मत लगाना।' गर्म राहत मिलो के दिल में खिल गई। उसने कृतज्ञता से सिर हिलाया।

मिलो ने केले का छिलका हटाया और उसे चार टुकड़ों में बाँट दिया। 'एक टारा के लिए, एक एली के लिए, एक ज़िप्पी के लिए, और एक मेरे लिए!' वे धूप भरे पेड़ों के नीचे हँसते हुए साथ-साथ चबाने लगे।

मिलो की बड़ी नीली आँखें चमक उठीं। उसने जाना कि प्यार से पूछना और सच्चाई कहना दोस्तों को पास रखता है। जब वे साथ मुस्कुरा कर खड़े थे, जंगल और भी उजला लगा।

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