टिमी टाइगर का उलट-पुलट दिन

टिमी की धारियाँ गायब हो जाती हैं और उनकी जगह चमकीले बिंदियाँ आ जाती हैं। दोस्तों की मदद और साथ से वह सीखता है कि बदलाव डरावना नहीं, मज़ेदार भी हो सकता है।

हरे-भरे जंगल में रहने वाला चंचल शावक टिमी एक सुबह उठता है तो पाता है कि उसकी धारियाँ गायब हैं और उसकी नाक से पूँछ तक गुलाबी-बैंगनी बिंदियाँ चमक रही हैं। घबराकर वह अपने दोस्तों जॅरी जिराफ और लिला लेपर्ड से मदद माँगता है। तब पता चलता है कि उसने रेनबो रॉक के पास ग्लिमरफ्रूट खा लिया था, जिसका असर सिर्फ एक दिन रहता है। दिन भर दोस्त उसके साथ खेलते हैं, हँसते हैं और उसे एहसास दिलाते हैं कि असली बात उसके फर की नहीं, उसके दिल की है। शाम तक उसकी धारियाँ लौट आती हैं, लेकिन टिमी एक नई सीख के साथ घर जाता है—बदलाव भी खुशी, हिम्मत और दोस्ती ला सकता है।

टिमी हरे-भरे जंगल में, सुनहरे गर्म आसमान के नीचे रहता था। वह एक चंचल शावक था, जिसकी छोटी-सी दहाड़ तेज थी, मुस्कान बड़ी थी, और उसके कई दोस्त थे जो उसके साथ घूमना पसंद करते थे।

हर दिन टिमी अंगड़ाई लेता, ठंडी नदी में छींटे मारता, तितलियों के पीछे भागता और मीठे आम खाता। लेकिन इस सुबह कुछ अजीब लगा, जैसे जंगल धीरे से कह रहा हो कि कुछ नया आने वाला है।

टिमी ने अपने पंजों को देखा और पलक झपकाई। कोई धारियाँ नहीं! गुलाबी और बैंगनी बिंदियाँ उसकी नाक से पूँछ तक चमक रही थीं। उसने शरीर झटका, मगर बिंदियाँ बनी रहीं। 'अरे, यह सच में हो रहा है!' वह बोला।

'मुझे क्या हो गया?' टिमी चिल्लाया, गोल-गोल घूमते हुए। वह नदी की ओर दौड़ा और अपनी चमचमाती परछाई देखी। बिंदियाँ नन्हें तारों की तरह चमक रही थीं, और चिंता से टिमी की मूँछें झुक गईं।

'मुझे मदद चाहिए,' टिमी ने आह भरी। वह अपने दोस्तों को ढूँढने चल पड़ा। सबसे पहले वह जॅरी जिराफ से मिला, जो ऊँची पत्तियाँ चबा रहा था। टिमी बोला, 'जॅरी, मुझे देखो! क्या तुम जानते हो मैं इतना धब्बेदार क्यों हूँ?'

जॅरी हँस पड़ा, 'तुम तो एक बड़ी कैंडी अंडे जैसे लग रहे हो!' उसका नाश्ता गिरते-गिरते बचा। टिमी ने मुँह फुलाया, 'मुझे मिठाई नहीं बनना, मुझे अपनी धारियाँ वापस चाहिए।' जॅरी कंधे उचका कर रह गया, उसे मदद का तरीका नहीं सूझा।

टिमी ने आगे लिला लेपर्ड को एक चट्टान पर धूप सेंकते देखा। उसने एक आँख खोली और मुस्काई। 'सुंदर बिंदियाँ, टिमी! बहुत सजधज।' टिमी कराहा, 'सजधज मैं नहीं हूँ।' लिला ध्यान से सुनने के लिए बैठ गई।

'तुमने क्या-क्या खाया, सब बताओ,' लिला ने प्यार से कहा। टिमी ने सोचा। 'आम, पानी—रुको! मैंने कल रात रेनबो रॉक के पास गिरे चमकीले फल को चबाया था।'

लिला ने ताली बजाई। 'वह ग्लिमरफ्रूट था! कहानियाँ कहती हैं कि इसे खाने वाले पर रंग चढ़ जाते हैं, लेकिन सिर्फ एक दिन के लिए।' टिमी के कान खड़े हो गए। 'तो मेरी धारियाँ आज रात लौट आएँगी?'

'हाँ!' लिला हँसी। 'जब तक तुम चमक रहे हो, चलो खेलें!' टिमी की चिंता पिघल गई। वह खुशी से उछला। जल्दी ही बंदर, पक्षी और कीड़े भी इकट्ठे हो गए, इंद्रधनुषी बाघ के साथ खेलने को उत्सुक।

उन्होंने जंगल में पकड़म-पकड़ाई खेली, लताओं पर झूले और हवा में ही रसीले आम पकड़े। पत्तों के बीच टिमी के चमकदार बिंदु चमके, जिससे सब हँस पड़े। वह शर्माने की जगह गर्व से भर गया।

टिमी ने समझा कि दोस्तों को उसका दिल पसंद है, उसकी फर नहीं। बिंदियाँ तो बस रंग थे। वह खुशी से दहाड़ा, नरम घास में लोटा, और सबको मज़ेदार कहानियाँ सुनाईं।

जब सूरज ने आकाश को नारंगी और गुलाबी रंग दिया, टिमी ने फिर से अपनी परछाई देखी। चमकदार बिंदियाँ फीकी पड़ गईं। उसकी गहरी काली धारियाँ फिर से नारंगी फर पर लौट आईं।

'धारियों, वापसी पर स्वागत है!' जानवरों ने खुशी मनाई। टिमी मुस्कराया, 'यह सबसे उलट-पुलट दिन था।' लिला बोली, 'जब दोस्त पास हों तो चौंकाने वाली बातें भी मज़ेदार होती हैं।' टिमी ने गर्व से सिर हिलाया।

उस दिन के बाद से, टिमी को अलग दिखने का डर कभी नहीं रहा। वह तो चाहता था कि बिंदियाँ फिर आएँ ताकि नई मज़ेदार मस्ती हो सके। शिक्षा: नए बदलाव खुशी, हिम्मत और शानदार दोस्त ला सकते हैं।

टिमी ने अपने दोस्तों को एक बड़ा-सा गले लगाया और खुश दिल के साथ घर लौट गया। समाप्त।

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