द बिग रेस

एक खरगोश और कछुआ पहाड़ी की चोटी तक दौड़ लगाते हैं। यह नैतिक कहानी सिखाती है कि धीरे-धीरे और लगातार चलने वाला ही अंत में जीतता है।

यह एक प्रसिद्ध नैतिक कहानी है जिसमें खरगोश और कछुए के बीच दौड़ होती है। खरगोश अपनी तेज़ रफ्तार पर घमंड करता है और रास्ते में सो जाता है, जबकि कछुआ बिना रुके धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहता है। अंत में कछुआ जीत जाता है और कहानी यह संदेश देती है कि घमंड नहीं करना चाहिए, तथा धैर्य और निरंतर प्रयास सफलता दिलाते हैं।

खरगोश बोला कछुए से, 'आओ दौड़ लगाएँ।'

कछुआ बोला धीरे से, “चलो अभी हम जाएँ।”

खरगोश भागा तेज़ बहुत, हवा से बातें करता गया।

थककर एक बड़े पेड़ तले,रास्ते में सो गया।

धीरे-धीरे चलता कछुआ,बिना रुके बस बढ़ता गया।

छोटे-छोटे कदम बढ़ाकर,आगे निकल गया।

जब खरगोश की आँख खुली, वह दौड़ा घबराकर--।

पर तब तक कछुआ पहुँचा, जीत गया वह जाकर।

धीरे-धीरे चलने वाला, जीत गया यह रेस।

घमंड कभी ना करना तुम, यही कहानी का संदेश।

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