रंगों और दोस्ती का त्योहार

अनाया होली के दिन उदास है क्योंकि उसका सबसे अच्छा दोस्त रोहन दूर चला गया है। एक रहस्यमयी दयालु महिला और रंगों की नई समझ उसे फिर से होली की सच्ची खुशी तक ले जाती है।

वृंदापुर में होली की तैयारियों के बीच अनाया का मन बुझा हुआ है, क्योंकि उसका सबसे अच्छा दोस्त रोहन उसके साथ नहीं है। तभी बाजार में मंदिर के बाहर एक रहस्यमयी महिला उससे मिलती है और रंगों के अर्थ समझाते हुए उसे रंगोली पूरी करने में साथ लेती है। अगले दिन एक प्यारे सरप्राइज के साथ अनाया को समझ आता है कि होली का सच्चा रंग सिर्फ गुलाल नहीं, बल्कि प्यार, दोस्ती, यादें और साथ होने की खुशी है।

वृंदापुर होली की खुशियों से गूंज रहा था। परिवार मिठाइयाँ बना रहे थे, इंद्रधनुषी रंग खरीद रहे थे और बड़े टब गुलाल से भर रहे थे। सब खिलखिला रहे थे, बड़ी रंगों की पार्टी के लिए तैयार।

फिर भी छोटी अनाया अपने दरवाजे पर बैठी दूर से देख रही थी। उसे होली बहुत पसंद थी, पर इस साल उसकी मुस्कान फीकी थी, मानो इंद्रधनुष से एक रंग गायब हो।

उसका सबसे अच्छा दोस्त रोहन दूर चला गया था, और त्योहार सूना लग रहा था। पड़ोसी बोले, 'अनाया, आओ खेलो!' वह धीरे से बोली, 'शायद बाद में,' और अपने घुटनों को गले लगा लिया।

माँ ने अनाया के बाल सहलाए। 'होली सिर्फ रंगों से बढ़कर है,' वह बोली। 'यह प्यार है, यादें हैं और मुस्कान बाँटना है। नई खुशियाँ तुम्हें ढूँढ लेंगी, भले ही रोहन दूर हो।'

उस शाम अनाया बाजार में घूमी। मंदिर के बाहर केसरिया साड़ी में एक महिला चमकदार रंगोली बना रही थी। उसकी दयालु आँखें और हल्की मुस्कान धूप जैसी लगी।

महिला ने पूछा, 'तुम्हें रंग पसंद हैं, बच्ची?' अनाया ने उदास सिर हिलाया। 'दोस्त के बिना होली फीकी लगती है।' महिला हँसकर बोली, 'होली हर रंग में खुशियों के सरप्राइज छुपाए बैठी है।'

उसने अनाया को रंगोली पूरा करने में मदद के लिए बुलाया। दोनों घुटनों पर बैठे और गुलाबी, हरी, नीली रेत डाली। हर मुट्ठी ने अनाया के दिल को एक छोटी त्योहार की आग जैसा गर्म कर दिया।

महिला बोली, 'गुलाबी प्यार है, हरा बढ़त है, पीला खुशी है, नीला भरोसा है। रंग दोस्तों को जोड़ते हैं, चाहे वे कितनी भी दूर हों।' अनाया ने अचानक रोहन को बहुत पास महसूस किया।

अनाया ने धीरे से कहा, 'धन्यवाद,' लेकिन जब उसने ऊपर देखा तो महिला गायब थी। बस चमचमाती रंगोली बची थी, जो चाँदनी में मद्धम चमक रही थी।

सुबह ढोल, मिठाइयों और रंगों के बादलों के साथ आई। अनाया अभी भी अपने फाटक पर झिझक रही थी। अचानक—छपाक! इंद्रधनुषी पानी की एक बाल्टी उसके सिर पर गिर पड़ी।

वह घूमी तो देखा—रोहन पानी वाली पिचकारी लेकर हँस रहा था। 'सरप्राइज! मैं होली के लिए घर आ गया!' अनाया खुशी से चीखी, रंग उसके गालों पर बह रहे थे।

'यह तो गुप्त योजना थी,' रोहन हँसा। 'मंदिर की एक दयालु महिला ने मम्मी से कहा कि एक दोस्त को मेरी ज़रूरत है।' अनाया की आँखें फैल गईं; उसे पता था वह महिला कौन थी।

उन्होंने मंदिर की ओर झाँका। रंगोली अब भी बिलकुल सही थी, न हवा ने छेड़ा और न पैरों ने। अनाया मुस्कराई, उसे यकीन था कि होली की खास जादू ने उन्हें मिलाया है।

हाथों में हाथ डालकर दोनों दोस्त भीड़ में दौड़ पड़े, रंग उड़ाए, मिठाइयाँ बाँटी और इस दिन को अपनी यादों में हमेशा के लिए सहेज लिया। होली कभी इतनी चमकीली नहीं लगी थी!

नीति: होली का सच्चा रंग प्यार है। यह दिलों को दोस्ती, खुशहाल सरप्राइज और साथ रहने की खुशी से रंग देता है।

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