मिमी मोल और सूरजमुखी का रहस्य
मिमी मोल अपनी सुरंग से बाहर झाँकती है, एक सूरजमुखी से मिलती है, और धूप, आसमान व पीले रंग की दुनिया को खोजते हुए सीखती है कि जिज्ञासा सुंदर सरप्राइज़ ला सकती है।
मिट्टी के नीचे अपनी आरामदायक सुरंग में रहने वाली मिमी मोल ने हमेशा ऊपर की दुनिया की कहानियाँ सुनी थीं—नीला आसमान, गर्म धूप और रंग-बिरंगे फूल। एक दिन सुरंग बनाते समय उसे एक मज़बूत डंठल मिलता है। जिज्ञासा से भरी मिमी उसका पीछा करते-करते पहली बार जमीन के ऊपर पहुँचती है, जहाँ उसका स्वागत चमकीली धूप और मुस्कुराते सूरजमुखी से होता है। यह कोमल प्रकृति-कथा बच्चों को खोज, साहस और सीखने की खुशी से परिचित कराती है।
जमीन के नीचे एक आरामदायक सुरंग में मिमी मोल रहती थी। वह काई के छोटे तकिए पर सोती थी, और उसकी छोटी शेल्फ़ पर चमकदार कंकड़ चमचमाते थे।
उसकी छत से जड़ों की लड़ियाँ पार्टी के फीते जैसी लटकती थीं। बिल सुरक्षित और आरामदायक था, जो व्यस्त खुदाई के बाद मिमी को कोमल आराम देता था।
कभी-कभी दोस्त आते और ऐसी चीज़ों के बारे में बताते जो उसने कभी नहीं देखी थीं। 'आज आसमान सबसे नीला है!' चहकते हुए पक्षी ने पंख फड़फड़ाए।
'सूरज तो गर्म सुनहरी कंबल जैसा लगता है,' खरगोश ने कहा। 'फूल तो इंद्रधनुषी पटाखों की तरह फूट पड़ते हैं!' गिलहरी ने हँसते हुए चमकती आँखों से जोड़ा।
मिमी ध्यान से सुनती और अपने मन में चित्र बनाती। उसने नीले आसमान और धूप की गर्माहट की कई कहानियाँ सुनी थीं, पर उसकी आँखों ने कभी मिट्टी के ऊपर झाँका ही नहीं था।
उस रात मिमी ने धीरे से कहा, 'काश मैं भी धूप और फूल देख पाती।' काई ने उसे थपथपाते हुए उम्मीद भरे सपनों में सुला दिया।
अगली सुबह सुरंग बनाते समय मिमी को कुछ चिकना और मज़बूत मिला—यह जड़ तो बिलकुल नहीं थी! जिज्ञासा ने उसकी पाँव गुदगुदा दिए।
'तुम कौन हो?' मिमी ने उस डंठल से पूछा। वह उसे पकड़कर ऊपर, और ऊपर, भुरभुरी मिट्टी को खोदती चली गई, उसका छुपा सिरा खोजने के लिए बेताब।
मिमी की नन्ही नाक खुली हवा में आ निकली। तेज रोशनी ने उसे झपकियाँ दिला दीं—ऊपर की दुनिया खजाने की तरह चमक रही थी!
उसने फैला हुआ नीला आसमान देखा, और गर्म धूप ने उसे कोमल आलिंगन की तरह घेर लिया। सब कुछ बड़ा, चमकीला और शानदार लगा।
उसके सामने सबसे ऊँचा, सबसे खुश फूल खड़ा था। पीली पंखुड़ियाँ सूरज की बूँदों की तरह चमक रही थीं, और उसका गोल चेहरा सुनहरी मुस्कान बिखेर रहा था।
'सूरजमुखी!' पास में उतरते ही पक्षी ने फुसफुसाया। मिमी की मूंछें खुशी से फड़फड़ाईं; उसने सचमुच कुछ खास खोज लिया था।
'तो यह है धूप,' मिमी ने लंबी साँस लेते हुए कहा। 'और यह चमकीला रंग है पीला।' उसने आँखें बंद कीं और कोमल गर्मी को महसूस किया।
मिमी के भीतर गुप्त खुशी जगमगा उठी, जैसे उसने अपने जिज्ञासु दिल के लिए बना कोई छुपा खज़ाना पा लिया हो।
अब जब दोस्त ऊपर की दुनिया की बातें करते हैं, तो मिमी मुस्कुरा देती है। वह जानती है कि हौसला भरे सवाल चमकीले, खूबसूरत जवाब ला सकते हैं।