सर हिकअप और छींकता ड्रैगन

टम्बलफोर्ड का नन्हा सर हिकअप एक जुकाम से परेशान, छींकता ड्रैगन से मिलता है। डर और गलतफ़हमी की जगह दया, देखभाल और समझदारी लेकर वह दोस्ती की राह खोलता है।

टम्बलफोर्ड में रहने वाला नन्हा सर हिकअप घबराने पर मज़ेदार 'हिक!' करता है, लेकिन उसके दिल में सच्ची बहादुरी बसती है। जब पहाड़ियों से एक विशाल 'आ-छीं!' गूँजता है और लोग डर जाते हैं, तब वही आगे बढ़ता है। पहाड़ी की चोटी पर उसे कोई राक्षसी दुश्मन नहीं, बल्कि लाल नाक वाला बीमार हरा ड्रैगन मिलता है, जो दूसरों को नुकसान न पहुँचे इसलिए छिपा है। सर हिकअप उसकी बात समझता है, गाँव वालों को सच बताता है, और सब मिलकर सूप, मफलर और अपनापन लेकर पहुँचते हैं। यह कहानी दिखाती है कि दया और समझ डर को दोस्ती में बदल सकते हैं।

टम्बलफोर्ड में नन्हा सर हिकअप रहता था। जब भी वह घबराता, वह ज़ोर से मज़ेदार 'हिक!' चिल्लाता। यही अजीब आवाज़ उसे उसका खास नाम देती थी।

चमचमाती बख़्तर में छन-छन करता और लकड़ी की तलवार डगमगाता हुआ, सर हिकअप ऊँचे शूरवीरों के पास से निकला। उसकी चमकीली नीली आँखों में अब भी बहादुर सपने चमकते थे।

उसने फुसफुसाया, 'एक दिन मैं बहादुर बनूंगा।' वह दिन सोच से भी जल्दी आने वाला था!

धड़ाम! एक विशाल 'आ-छीं!' पहाड़ियों पर गूँजा। भेड़ें भागीं, सेब गिर पड़े, और पतला धुआँ नीले आसमान में उठ गया।

मेयर ने घंटी बजाई, 'एक छींकता ड्रैगन हमारी गायों को डरा रहा है!' बड़े शूरवीर बोले, 'मैं नहीं जाऊँगा!' नन्हे सर हिकअप ने 'हिक!' किया और कहा, 'मैं जाऊँगा!'

उसने रोटी, पानी और अपनी लकड़ी की तलवार बाँधी। पथरीली पहाड़ी पर वह चढ़ा—हिक…हिक…हिक!

चोटी पर उसने एक विशाल हरे ड्रैगन को बीमार बिल्ली की तरह कुंडली मारते देखा। उसकी नाक लाल थी, पूँछ काँपी, फिर—'आ-छीं!'—लपटें निकल पड़ीं।

सर हिकअप ने चट्टान के पीछे से झाँका, 'हेलो?' ड्रैगन ने सूँघा, 'दूर रहो, मैं खतरनाक हूँ। मेरी जुकाम आग उगलता है!' सर हिकअप थोड़ा और पास आया, 'मैं नहीं डरता।'

'मैं छिपता हूँ ताकि किसी को जला न दूँ,' ड्रैगन ने आह भरी। सर हिकअप ने सिर हिलाया, 'मेरी हिक भी लोगों को हँसाती है। मैं समझता हूँ।'

सर हिकअप ने एक मज़ेदार 'हिक!' किया। ड्रैगन हँसा, फिर छोटी-सी आग वाली छींक से एक गरम अलाव जल उठा। दोनों दोस्त मुस्कुराए।

शहर लौटकर सर हिकअप बोला, 'ड्रैगन को बस देखभाल चाहिए!' गाँव वालों ने सब्ज़ी का सूप पकाया और रस्सी जितना लंबा मफलर ढूँढा।

सर हिकअप की अगुवाई में वे सूप, मफलर और सींगों के लिए छेद वाली टोपी पहाड़ी पर ले गए। ड्रैगन ने धन्यवाद कहा और वादा किया कि अब वह केवल नदी की ओर छीकेगा।

जल्द ही दोस्तों ने दो कुर्सियों वाला एक झोपड़ा बना लिया। सर हिकअप अब भी हिक करता, ड्रैगन अब भी छींकता, और लोग हँसने की जगह मुस्कुरा देते।

'उसकी हिक मुझे खुश कर देती है,' ड्रैगन बोला। सर हिकअप खिल उठा। सीख: छोटे नायक और जुखामी ड्रैगन कोमल दया से दुनिया बदल सकते हैं।

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