बारिश से डरने वाला छोटा बादल
एक शर्मीला छोटा बादल बहादुर बनना सीखता है, धरती पर बारिश बरसाकर फूलों, मेंढक और बच्चों की मदद करता है, और जल चक्र के खुशहाल घेरे को समझता है।
पफी एक छोटा, सफेद और सपनीला बादल है जिसे बारिश बनकर गिरने से डर लगता है। उसे लगता है कि अगर वह बरस गया तो शायद फिर कभी आसमान में तैर नहीं पाएगा। लेकिन जब धरती सूखने लगती है, फूल मुरझा जाता है और तालाब सिकुड़ने लगता है, तब सनी, हवा और गरजू उसे जल चक्र का राज समझाते हैं। यह कोमल विज्ञान-आधारित कहानी बच्चों को दिखाती है कि बारिश डरावनी नहीं, बल्कि मददभरी यात्रा का हिस्सा है।
खेतों और शहरों के ऊपर ऊँचाई पर पफी रूई के फाहे जैसा बहता है। वह मुस्कुराता है जब वह बच्चों को भागते, पतंगों को नाचते और पक्षियों को नीले आसमान में फुर्र से उड़ते देखता है।
कभी-कभी बड़े धूसर बादल गरजते हैं, 'धड़ाम! हम बिजली और जोरदार छींटे बनाते हैं!' उनकी तेज आवाज से पफी काँप जाता है। उसे तूफ़ानी बनने की बजाय छोटा, सफेद और सपनीला ही रहना अच्छा लगता है।
पफी के मन में एक छुपा डर है: अगर वह बारिश बनकर गिर गया तो फिर कभी तैर नहीं पाएगा! जब काला आसमान घिरता है, वह धूप वाली हवा की तरफ तेज़ी से भागता है, हवा में पत्ते की तरह काँपता हुआ।
एक गरम दिन धरती फट गई और धूल से भर गई। एक नन्हा पीला फूल मुरझा गया, और एक प्यासा मेंढक सिकुड़ते तालाब के किनारे टर्राया। यह देखकर पफी का दिल भारी हो गया।
गरजू, एक दयालु पर बड़ा सा धूसर बादल, उसके पास आकर बोला, 'मित्र, धरती को पानी चाहिए। चलो साथ में बरसें।' पफी ने घूँट भरा और धीरे से कहा, 'शायद मैं बस देखूँगा।'
चमकीला सनी झाँक कर बोला, 'पफी, तुम एक खास टीम का हिस्सा हो।' उसकी सुनहरी किरण नीचे दूर चमचमाती झील की ओर इशारा करती है। 'देखो और सीखो,' सनी ने धीमे से कहा।
सूरज ने पानी को गरम किया। भाप की छोटी-छोटी लोएँ अदृश्य गुब्बारों की तरह ऊपर उठने लगीं। 'ये नन्ही बाफें तुमसे मिलकर नए बादल बनेंगी,' सनी ने समझाया।
सनी ने जोड़ा, 'हर बादल झील, नदी, यहाँ तक कि गड्ढों की बूँदों से बनता है। आकाश में तुम सब मिलकर काम करते हो—बड़े, छोटे, सफेद या धूसर।'
हूँश! हवा घूमती हुई आई। 'जब तुम भारी हो जाते हो, तो बूंद बनकर जड़ों को पानी देते हो, तालाब भरते हो और बच्चों को भिगोते हो। आराम करने के बाद तुम फिर उठ जाते हो। यह एक बड़ा, खुशहाल चक्कर है!'
सनी ने सिर हिलाया, 'इस घेरे को जल चक्र कहते हैं। पफी, तुम कभी गायब नहीं होते। तुम सफर करते हो, मदद करते हो, और हर बार नए बनकर लौटते हो।'
पफी ने सूखी धरती की ओर झाँका। 'मुझे अब भी डर लग रहा है,' उसने आँह भरी। गरजू ने स्नेह से गरजते हुए कहा, 'बहादुरी मतलब अपनी बारिश बाँटना, चाहे बादल के घुटने काँप रहे हों।'
गहरी साँस लेकर पफी ने हल्की फुहार पीले फूल पर बरसने दी। फूल ने सिर उठाकर फुसफुसाया, 'धन्यवाद!' हवा ने खुशी से कहा, 'छोटी बारिश, बड़ी मदद!'
अब हिम्मत पाकर पफी ने नरम-नरम बारिश बरसाई। मेंढक खुश होकर छपछपाया, घास हरा हो गया, और बच्चे बूँदों में घूमते हुए चिल्लाए, 'वाह, बारिश!' पफी खुशी से चमक उठा।
जल्दी ही वह फिर फाहे जैसा हल्का महसूस करने लगा। 'क्या यह अलविदा है?' उसने पूछा। सनी मुस्कराया, 'अलविदा नहीं—फिर मिलेंगे!' पफी शाँत और गर्व से तैरता हुआ चला गया।
कुछ दिन बाद गर्म धूप ने गड्ढों से धुंध उठाई। वह धुंध इकट्ठा होकर एक नया छोटा बादल बनी। 'वाह, मैं वापस आ गया!' पफी हँसा। सनी, हवा और गरजू ने चमकती मुस्कान के साथ उसका स्वागत किया।
'बारिश बनना ज़रूरी है,' पफी ने खिले फूल और उछलते मेंढक को देखते हुए कहा। वह गर्व से फूला नहीं समाया, खुशी थी कि उसने मदद की।
'मुझे अब भी थोड़ा घबराहट है,' उसने माना, 'पर अगली बार मैं जल्दी बरसूँगा!' अब पफी जान गया था कि जल चक्र उसे हमेशा एक नई मददभरी यात्रा पर वापस लाएगा।