नीले जूतों वाला नया बच्चा

नए छात्र सामी के चूँ-चूँ करते नीले जूते उसकी घबराहट को हँसी में बदल देते हैं और स्कूल में नए दोस्त बनाने में मदद करते हैं।

सामी अपने चमचमाते नीले जूतों के साथ नए स्कूल की कक्षा में आता है, लेकिन सबकी नजरें उस पर टिक जाने से वह घबरा जाता है। उसके जूतों की मज़ेदार चूँ-चूँ उसे और संकोची बना देती है। फिर छुट्टी में मीरा उससे दोस्ती करती है, उसके जूतों की आवाज़ को खेल और हँसी में बदल देती है। धीरे-धीरे सामी का डर कम होता है, और वही जूते उसकी नई दोस्तियों की शुरुआत बन जाते हैं। यह कहानी दिखाती है कि कभी-कभी हमारी अलग बात ही हमें दूसरों से जोड़ देती है।

रोशन सोमवार की सुबह, सामी कक्षा में चला गया। सबकी निगाहें उसके चमचमाते नीले जूतों पर टिक गईं। वे आसमान की तरह चमक रहे थे, और सामी को गर्व भी था और थोड़ी घबराहट भी।

धप्प, चीं! धप्प, चीं! सामी चलता तो उसके जूते मज़ेदार आवाज़ करते। वह चाहता था कि वे शांत हो जाएँ ताकि कक्षा उसे इतना न देखे।

सामी दरवाज़े पर खड़ा रहा, अपना छोटा बैग कसकर पकड़े। नई कक्षा, नई टीचर, नए चेहरे—सब कुछ उसे बड़ा और अजीब लग रहा था।

मिस रिया मुस्कुराईं। 'क्लास, यह सामी है।' बच्चों ने हाथ हिलाए। एक बच्चे ने फुसफुसाया, 'देखो, नीले जूते!' सामी के गाल स्ट्रॉबेरी जैसे लाल हो गए।

सामी ने अपनी मेज़ के नीचे पैर बिलकुल हिला-डुला कर नहीं रखे। छुट्टी की घंटी बजी तो बच्चे दौड़ते हुए बाहर गए, लेकिन सामी धीरे-धीरे चला—चूँ, चूँ, चूँ। कुछ बच्चों ने मुड़कर देखा तो वह रुक गया।

वह बाड़ के पास वाली बेंच पर अकेला बैठ गया और अपने जूतों को घूरता रहा। क्या ये बहुत चमकदार हैं? बहुत शोर करते हैं? चारों तरफ खेल के शोर में सामी खुद को बहुत छोटा लगा।

मीरा, दो चोटी वाली चंचल लड़की, कूदती हुई रस्सी लेकर आई। 'हाय, मैं मीरा हूँ!' वह चहकी। सामी ने शरमाते हुए हाथ हिलाया, 'हाय।'

मीरा ने जूतों को झाँका। सामी ने उन्हें छिपाने की कोशिश की। वह हँसी, 'मुझे ये पसंद हैं! इनसे छोटे बत्तखों की क्वैक-क्वैक जैसी आवाज आती है!'

सामी खुद हँस पड़ा। 'ये क्वैक नहीं करते,' उसने कहा। मीरा घूमी और गाने लगी, 'क्वैक-क्वैक-चूँ!' सामी की हँसी और जोर से खिलखिला उठी।

मीरा ने अपनी कूदने वाली रस्सी आगे की। 'खेलोगे?' सामी ने चिंता की, 'अगर मैं गिर गया तो?' 'तो हम दोनों साथ गिरेंगे!' मीरा ने दाँत दिखा कर कहा। यह सुनकर सब सही लगा।

सामी खड़ा हुआ। चूँउँ! मीरा ताली बजाई, 'तुम्हारे जूते गाना गा रहे हैं!' वे बाकी बच्चों के साथ रस्सी कूदने लगे, हर छलांग पर एक खुशमिजाज चूँ हुई।

जल्दी ही सभी बच्चे उन चूँ-चूँ पर हँसने लगे। 'फिर से करो!' एक लड़के ने चिल्लाया। पूरा खेल का मैदान कूदों, चूँ-चूँ और खुश आवाज़ों से गूंज उठा।

लंच तक सामी अब शांत बच्चा नहीं रहा। वह नीले, चूँ-चूँ वाले जूतों के साथ निडर कूदने वाला बन गया था, और उसके चारों ओर नए दोस्तों का घेरा था।

घर जाने के समय मिस रिया ने पूछा, 'पहला दिन अच्छा रहा?' सामी ने अपने जूतों को देखा और मुस्कुराया, 'सबसे अच्छा! मेरे जूतों ने मुझे दोस्त बनाने में मदद की।'

सामी और मीरा साथ-साथ घर की ओर चले—चूँ, चूँ, चूँ। हर आवाज़ ने फुटपाथ पर खुशियों की छोटी लकीर छोड़ दी।

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